लक्ष्य

हर रात सोने से पहले अपने प्रयासों का हिसाब लगाती हूँ।

नींद आती है सुकून भरी,जब लक्ष्य के थोड़ा और करीब पाती हूँ।

प्रेम

प्रेम की नहीं कोई सटीक परिभाषा

कभी मां की ममता

कभी पिता की वत्सलता

कभी भाई का अधिकार

कभी बहन का दुलार

कभी मित्रों की सलाह

कभी अपनों की परवाह

कभी प्रीतम की प्रीत

कभी प्रेयसी की जीत

कभी विहरन की आस

कभी मिलन की प्यास

कभी संगीत के सुर

कभी प्रार्थना मधुर

कभी अधुरी कहानी

कभी किसी की कुर्बानी

अनगिगत है प्रेम के रूप

कभी छांव कभी धूप

प्रेम है प्रेमी मन की भाषा

प्रेम की नहीं कोई सटीक परिभाषा।

ख्वाब

हर रात एक ख्वाब बुनती हुँ

अपनी राह मैं खुद चुनती हुँ

जमाना देता है हिदायतें बेहिसाब

पर अक्सर मैं दिल का सुनती हुँ।

“स्नेहलता”

Chocolate day

Rose day ,propose day and today is chocolate day.what are the significance of these days?I think the object behind these celebrations is only to convey the message of love .Love means not only the love between boy and girl.Love means a attitude of kindness towards the whole universe.

Chocolates represent sweetness.So when we exchange chocolates actually we are committed to exchange the sweet words and behaviour as well.

SO FRIENDS TODAY WE SHOULD VOW TO SPREAD SWEETNESS EVERYWHERE BY OUR WORDS AND BEHAVIOUR.img-20170209-wa0057

Gulab

प्यार मिला, परिवार मिला,कुछ ख्वाब बाकी है
दिल में उठे सवालों के जवाब अभी बाकी है
महक रहा है उपवन भीनी महक से,
स्रेह सौरभ से सुवासित गुलाब अभी बाकी है।

आशा  का  बसन्त   

न  हो  मन मॆ ,बस  आशा  का अंत 

छाया  रहेगा  जीवन  मॆ हमेशा  बसंत 

उम्मीद  की  लौ  पर  जला  दीपक 

हर लेता  है हर  अँधेरा 

काली  रात  के बाद  आता है 

हमेशा   उज्ज्वल  सवेरा 

मुश्किलो  के बिना जीवन का 

सफ़र  कभी कटता  नहीँ 

हौसला  हो बुलंद ,मिटती  है  मुश्किलें 

इंसान  कभी मिटता  नहीँ 

मन के जीते  जीत है 

मन के  हारे  हार

मन से ही  वीराने  जग  मॆ 

मन  से ही  सजते  त्यौहार 

पतझर  मे  फिज़ायें  न  होती  मायूस 

करती  है  ऋतुराज  का इंतजार 

खिलते आशा  के सुमन  जहां 

छा  जाती  है  वहाँ  बहार 

बसंत पर्व  पर दुआ  है मेरी 

हो  निराशाओं  का   अंत 

छाया  रहे दिलों  पर  

आशा  का बसन्त ।

Yado ka samander

Yado  ke Samander mai gote lagata Mann

Bar bar nayan bhigata mann

Khushi bhare Palo ka hisab milata Mann

Fir se aaj mai laut aata Mann!

Kyon beeti rasmein dohrata Mann

Meethi takrare gale lagata Mann

Kabhi khilkhilata kabhi murjhata Mann

Fir se aaj mai laut aata Mann!

Mann he Mann khud ko samjhata Mann

Udas “sneh” ko rijhata Mann

Uljhi paheliya suljhata Mann

Fir se aaj mai laut aata Mann!