स्वप्न कभी मरते नहीं

यह कविता वेदान्त दवे जी के लेख से प्रेरित है।

जिन्हे जुनून है साहिल तक पहुँचने का

वो सागर के थपेड़ो से डरते नहीं

जिनके सीने में सुलगता है जज्बा,कुछ कर दिखाने का

उनके स्वप्न कभी मरते नहीं

स्वप्न धड़कते है दिल की धड़कन बनकर

स्वप्न सताते है दिन रात तड़पन बनकर

स्वप्न वो अहसास है जो उन्हे जिन्दा रखते है

बनकर लहु जो उनकी नसों मे बहते है

बिना पतझर चमन को बहार नहीं मिलती

संघर्ष  बिना जिंदगी को रफ्तार नहीं मिलती

युं तो जीते है सब चंद सांसे चलाकर

पर आजकल जिंदादिलों की कतार नहीं मिलती

स्वप्न को रखो जीवित ,तो तुम्हारा जीना ;जीना है

वरना बढती उम्र का घूंट आंख मूंद कर पीना है

हिदायतें हजार देता है जमाना, पर अकेला तुम्हे चलना है

क्योंकि स्वप्न तुम्हारा है तो साकार तुम्हें ही करना है

जिनकी आंखो में रहते है स्वप्न

वे बेबुनियादी बातें करते नहीं

जिनके सीने  मे सुलगता  है जज्बा कुछ कर दिखाने का

उनके स्वप्न कभी मरते नहीं।

नया सम्वत् 2074

2017 हम सब  को याद था।हमने धूमधाम से मनाया।कई संकल्प लिये।नये साल  का उत्साह सभी को रहता है,रहना भी चाहिए ।नया सम्वत् 2074 दस्तक दे रहा है।हिंदी कैलेण्डर के अनुसार नया साल ,फिर यह हमें याद क्यों नहीं?न केवल हिन्दी साल अपितु हिन्दी भाषा भी हमारे जीवन  से विस्मृत सी होती जा रही है।

अंग्रेजी बोलने अथवा सीखने से मुझे कोई आपत्ति नहीं लेकिन राष्ट्रभाषा के प्रति बेपरवाही एवं असम्मान का रवैया मेरा दिल कचोटता है।

मेरा मानना है हर हिंदुस्तानी हिन्दी भाषा का ज्ञान रखें।हिन्दी बोलने पर गर्व की अनुभूति हो।मातृभूमि से जुड़ी हर चीज की सुरक्षा हमारा दायित्व  है।क्यों न नये साल पर हम यही संकल्प लें।

“नया सम्वत् 2074 हो सभी के लिए मंगल

मिट जाए दिलों से द्वेष और दंगल

हिन्दी भाषा की सुरक्षा का करें हम वादा

संस्कृति के सम्मान का रखें नेक इरादा।”

 

हम साथ साथ है

संयुक्त परिवार भारतीय संस्कृति की अनमोल देन है।आज मेरे छोटे देवर 10 साल साथ रहने के बाद असम settle होने जा रहे है।देवरानी शैलु  और प्यारी बिटिया दिशा कविशा को हम बहुत याद करेंगे।20170321_235117.jpg

चार लाइनें

हर रोज कुछ नया करने का प्रयास करूं

लीक से हटकर कुछ एकदम खास करूं

कभी न  डगमगाये मेरे कदम नेक राह से

खुद से ज्यादा बुलंद इरादों पर विश्वास करूं।